इन्द्रजाल की विद्या के कुछ नियम 3

माला और  उसकी डोरी
माला के विभिन्न भेदों का विचार करना भी आवश्यक है। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि भगवत भक्ति के लिए प्रयोग की जाने वाली माला का प्रयोग इन अनुष्ठानों के लिए कदापि न करें। तुलसी की माला का प्रयोग इन अनुष्ठानों में हमेशा वर्जित है। अतः इन अनुष्ठानों की सिद्धि के लिए निम्नलिखित मालाओ का प्रयोग करना चाहिए।
1 -शांति कर्म के अनुष्ठान के लिए कमलगट्टा की माला कमल के तन्तुओ में बनाना चाहिए। इनकी संख्या 51 दानों की होनी चाहिए।
2 – स्तम्भन के लिए कमलगट्टा की माला और रेशम के तन्तुओ में बनाना चाहिए। दानों की संख्या 27 होनी चाहिए।
3 – वशीकरण के लिए मोतियों की माला और स्त्री के बालों में पिरोया जाना चाहिए। दानों की संख्या 108 होनी चाहिए।
4 - विद्वेषण अर्थात वैर के लिए लोहे के दानों की माला और घोड़े की पूंछ के बालों में पिरोया जाना चाहिए। दानों की संख्या 111 होनी चाहिए।
5 – उच्चाटन के लिए सूत्र की माला और ताँबे के तार में पिरोया जाना चाहिए। दानों की संख्या 13 होनी चाहिए
6  - मारण कर्म की सिद्धि के लिए बहेड़ो की माला होनी चाहिए। दानों की संख्या 15 होनी चाहिए।

यदि इतनी तरह की मालाओ का इन्तजाम न हो तो अनुष्ठान कर्ता रूद्राक्ष की 108 दानों की माला से अनुष्ठान को सफल कर सकता है। यदि यह भी न मिले तो मूंगे की माला से अनुष्ठान किया जा सकता है।

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