योग
अश्विनी नक्षत्र के प्रारंभ से सूर्य और चन्द्रमा दोनों मिलकर 800 कलाओं को आगे चलतें हैं। इन्हीं 800 कलाओं के चलते एक योग बीतता है। इसी प्रकार जब दोनों ग्रह 12 राशियां अर्थात 21600 कलाओं को अश्विनी नक्षत्र से आगे चलते हैं तब यह 27 योग बीतते हैं।सूर्य और चन्द्रमा दोनों के स्पष्ट स्थानों को जोड़कर तथा कलाऐं बनाकर 800 का भाग देने पर गत योगों की संख्या निकाल लेते हैं। बाकी यह पता करें कि वर्तमान योग की कितनी कलाएँ बीत गयीं। शेष को 800 में से घटाने पर वर्तमान योग की गम्य कलाएँ निकल आतीं हैं। इन कलाओं को 30 से गुणा कर सूर्य और चन्द्रमा की स्पष्ट दैनिक गति से भाग देने पर वर्तमान योग की गत और गम्य घटिकाऐं निकल आतीं हैं।
योग स्वामी योग स्वामी योग स्वामी
1-विष्कुम्भ यम प्रीति विष्णु आयुष्मान चन्द्रमा
2-सौभाग्य ब्रह्मा शोभन बृहस्पति अतिगण्ड चन्द्रमा
3-सुकर्मा इन्द्र धृति जल शूल सर्प
4-गण्ड अग्नि वृद्धि सूर्य ध्रुव भूमि5-व्याघात वायु हर्षण भग वज्र वरूण6-सिद्धि गणेश व्यतीपात रूद्र वरीयान कुबेर7-परिघ विश्वकर्मा शिव मित्र सिद्धि कार्तिकेय8-साध्य सावित्री शुभ लक्ष्मी शुक्ल पार्वती9-ब्रह्म अश्विनी कुमार ऐन्द्र पितर वैधृति दिती
अगले भाग में हम करण के और उनके स्वामियों के बारे में जानेंगे...................
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