*घर की सफाई पर विशेष ध्यान देना है क्योंकि कहते हैं जहां सफाई और शान्ति वहां पर लक्ष्मी का निवास।
*घर में रोजाना पानी में थोड़ा नमक डाल कर पौछा लगाये इससे नकारात्मता बाहर निकलेगी और परिवार में प्रेम बना रहेगा।
*घर में दक्षिणावर्ती शंख,बांसुरी,वास्तुदोष निवारक यंत्र,श्री यंत्र,मोर पंख ,तुलसी का पौधा अवश्य रखें इससे ग्रह शान्त रहते हैं और समृद्धि बढ़ेगी।
*घर में पूजाघर ईशान में उत्तम होता है अगर इस दिशा में न बन पाये तो पूर्व या उत्तर में बनाने की कोशिश करें।
*पूजाघर में पाँच अथवा सात अथवा ग्यारह से अधिक नहीं होनी चाहिए और कोशिश करें कि प्रत्येक देवता की एक ही मूर्ति हो। इन मूर्तियों में लक्ष्मी-गणेश,विष्णु,कुबेर अवश्य रखें।
*घर के किसी बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता तो उस बच्चे का पूजाघर के दीपक पर रोजाना ध्यान लगवाने की कोशिश करें। इससे उसकी स्मरण शक्ति तेज होगी और पढ़ाई में मन लगेगा।
*सभी बच्चों को माता-पिता का आदर करना चाहिए ।
*घर में सप्ताह में एकबार कपूर अवश्य जलाया करें।
*भारी सामान दक्षिण दीवार के सहारे रखें।
*घर में नगदी और धन वाली अलमारी ऐसी रखी होनी चाहिए कि वह उत्तर की ओर खुले।
*दवाओं को पूजाघर के पास रखें इससे रोगी को जल्दी असर करतीं हैं।
*शीशा सोने वाले कमरे में न हो क्योंकि रात में इसमें अपना अक्ष दीखने पर यह नकारात्मता फैलाता है। आधुनिक युग में ज्यादातर यही नकारात्मता फैला रहे हैं।
*जागते समय अपनी हथेलियों का दर्शन शुभ होता है। क्योंकि करमध्ये निवास: लक्ष्मी अर्थात हाथों के मध्य में लक्ष्मी का निवास स्थान माना गया है।
*अपने भोजन में से एक रोटी गाय,दुसरी कुत्तों को,तीसरी रोटी कौओं को निकालनी चाहिए।
*मुकदमा में विजय के लिए कोर्ट को जाते समय रास्ते कौआ को रोटी अवश्य खिलायें और मन ही मन ईश्वर से प्रार्थना करें और अपने पापों की क्षमा मांगें।
*सभी से मधुर व्यवहार करें, कहते हैं कि इससे बड़ा कोई तीर नहीं।
*अपनी राशि अनुसार अपने ईष्ट का मंत्र जाप अवश्य करें।
*अपने जीवन काल में एक पीपल और एक वट अर्थात बरगद वृक्ष अवश्य लगाये शास्त्रों के अनुसार यह परलोक के लिए शुभ बताया गया है।
*शनि ग्रह कर्म फल दाता है और इनकी गति धीमी है अर्थात जब रुष्ट होने पर लम्बे समय तक दुख देते हैं इसलिए पराई स्त्री पर बुरी निगाह,चोरी करना,छल करना,किसी से कपट रखने और किसी को मारने पर जल्दी रुष्ट होकर भयंकर परिणाम देते हैं।
*सूर्य छिपने के बाद किसी को दही,छाछ और रूपये का दान न करें क्योंकि इससे धीरे धीरे समृद्धि चली जाती है।
*रसोई में नहाकर अथवा मुँह-हाथ धोकर और कुल्ला करके ही प्रवेश करें। पहला अन्न का किनका अग्नि देवता को दें।
*मांस मंदीरा का सेवन न करें और धुम्रपान से बचें ।
*चौराहे पर ध्यानपूर्वक चले 80% नकारात्मक ऊर्जा यहीं पर होती हैं। इन्हीं चौराहों पर इनका लगना और तंत्र द्वारा छोड़ना लगा रहता है।
*घर से बाहर निकलते समय बड़ों का आशीर्वाद जरूर ले लें।
*यदि आप बहुत परेशान चल रहे हैं हर काम बिगड़ रहा है और बीमारी ने घर कर रखा है तो आपको एक सरल उपाय बता रहा हूँ आप अपने सिर पर सफेद रूमाल बाँध कर घर से शनिवार के दिन गंगा स्नान के लिए ऐसे निकले कि आपको कोई टोके न। स्नान करने के बाद फिर वहां बंदरों को कुछ खिलायें और से जल भर कर सीधे घर आना है। जल कही नहीं चढ़ाना वही जल रोगी को पिलायें और छींटे का छिड़काव रोगी के शरीर पर करें। नकारात्मता से परेशान होगा तो तुरंत ठीक हो जायेगा।
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