अशुभ ग्रहों की शान्ति के लिए अनेक विद्वानों ने अपने अपने अनेक उपाय बताये हैं।आज के विद्वान तो बहुत ही कीमती उपाय बता रहे हैं। जो मध्यम या निम्न वर्ग के लिए सम्भव नहीं है। ग्रहोंका प्रभाव तो विचारे उन लोगों पर भी होता है ऐसे में वे क्या करें। आज हम उनके लिए विशेष प्रभावी उपाय लेकर आये हैं। और बिल्कुल निःशुल्क। आप यदि थोड़ी सी मेहनत करके ग्रहों को शान्त करने में सफल हो जायेंगे। जैसा कि नीचे आपको बताया गया है कि ग्रह से सम्बंधित जड़ धारण करें और उनसे सम्बंधित मंत्र बतायी गयी संख्या में जाप करें। अधिक जानकारी के लिए आप हमारे ग्रह से सम्बंधित जानकारी के समस्त भाग पढ़ले तो, आपको दिनों का भी ज्ञान हो जायेगा।
सूर्य
बीज मंत्र:- ऊँ घृणि: सूर्याय नम:
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- आक की जड़ रविपुष्य योग में ग्रहण की हुई धारण करें।
चन्द्र
बीज मंत्र:- ऊँ सों सोमाय नम:
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- ढाक की लकड़ी, खिरनी का मूल धारण करें।
मंगल
बीज मंत्र:- ऊँ अं अंगारकाय नम:
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- खदिर की जड़ या नाग जिह्वा (अनन्त मूल) धारण करें।
बुध
बीज मंत्र:- ऊँ बुं बुधाय नम:
जप संख्या-सवा लाख
जड़ी- अपामार्ग,विधारा की जड़ धारण करें।
बृहस्पति
बीज मंत्र:- ऊँ बृं बृहस्पते नमः
जप संख्या-एक लाख
जड़ी- पीपल मूल या भांरगी धारण करें।
शुक्र
बीज मंत्र:- ऊँ शुं शुक्राय नमः
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- ओदुम्बर या सिंह पुच्छ का मूल धारण करें।
शनि
बीज मंत्र:- ऊँ शं शनैश्चराय नमः
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- छोकरा(शमी) की लकड़ी या बिच्छु घास की जड़ धारण करें।
राहु
बीज मंत्र:- ऊँ रां राहवे नमः
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- कुश (डाब) की जड़ या सफेद चन्दन अथवा दुर्वा की जड़ धारण करें।
केतु
बीज मंत्र:- ऊँ कें केतवे नमः
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- असगन्ध की जड़ या काश की जड़ धारण करें।
सूर्य
बीज मंत्र:- ऊँ घृणि: सूर्याय नम:
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- आक की जड़ रविपुष्य योग में ग्रहण की हुई धारण करें।
चन्द्र
बीज मंत्र:- ऊँ सों सोमाय नम:
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- ढाक की लकड़ी, खिरनी का मूल धारण करें।
मंगल
बीज मंत्र:- ऊँ अं अंगारकाय नम:
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- खदिर की जड़ या नाग जिह्वा (अनन्त मूल) धारण करें।
बुध
बीज मंत्र:- ऊँ बुं बुधाय नम:
जप संख्या-सवा लाख
जड़ी- अपामार्ग,विधारा की जड़ धारण करें।
बृहस्पति
बीज मंत्र:- ऊँ बृं बृहस्पते नमः
जप संख्या-एक लाख
जड़ी- पीपल मूल या भांरगी धारण करें।
शुक्र
बीज मंत्र:- ऊँ शुं शुक्राय नमः
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- ओदुम्बर या सिंह पुच्छ का मूल धारण करें।
शनि
बीज मंत्र:- ऊँ शं शनैश्चराय नमः
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- छोकरा(शमी) की लकड़ी या बिच्छु घास की जड़ धारण करें।
राहु
बीज मंत्र:- ऊँ रां राहवे नमः
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- कुश (डाब) की जड़ या सफेद चन्दन अथवा दुर्वा की जड़ धारण करें।
केतु
बीज मंत्र:- ऊँ कें केतवे नमः
जप संख्या- सवा लाख
जड़ी- असगन्ध की जड़ या काश की जड़ धारण करें।
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